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जनता का विश्वास जीतने के लिए उनकी मार्गदर्शक बने पुलिस: मुर्मु

नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पुलिस से नागरिकों के मार्गदर्शक की भूमिका अपनाने पर जोर देते हुए कहा है कि इससे जनता और पुलिस के बीच विश्वास मजबूत होगा तथा लोग बिना किसी डर के शिकायत दर्जा करा सकेंगे।

श्रीमती मुर्मु ने गुरुवार को गंगटोक में सिक्किम पुलिस को ‘भारत के राष्ट्रपति का पुलिस कलर’ प्रदान करने के अवसर पर यह बात कही।

उन्होंने कहा कि भारत की पुलिस व्यवस्था पर औपनिवेशिक शासन की लंबी छाप रही है। उस समय पुलिस का प्राथमिक उद्देश्य जनता की सेवा करना नहीं, बल्कि उन्हें नियंत्रित करना और शासक व्यवस्था के आदेशों को सख्ती से लागू करना था। परिणामस्वरूप, पुलिस व्यवस्था के भीतर एक औपनिवेशिक मानसिकता ने जड़ जमा ली थी।

उन्होंने कहा कि यह मानसिकता अब बदल रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए इस औपनिवेशिक दृष्टिकोण को पूरी तरह से छोड़ना होगी तभी नागरिक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में पूरे मन से योगदान दे पाएंगे।

राष्ट्रपति ने पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को अनिवार्य बताते हुए कहा कि पुलिस तंत्र को और अधिक नागरिक-अनुकूल बनाया जाना चाहिए, ताकि आम लोग बिना किसी डर के अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पुलिस को नागरिकों के लिए भागीदार और मार्गदर्शक के रूप में कार्य करना चाहिए। इस सहयोगात्मक भूमिका को अपनाने से, जनता और पुलिस के बीच विश्वास मजबूत होगा। जब पुलिस लोगों की समस्याओं को समझेगी और सहायता करेगी, तो इससे समाज के भीतर सुरक्षा की भावना बढ़ेगी और साथ ही कानून के शासन के प्रति सम्मान भी गहरा होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराधियों को पकड़ने तक ही सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि एक सुरक्षित और सामाजिक रूप से जागरूक समाज के निर्माण तक होना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर खुशी जतायी कि 1897 में स्थापना के बाद से सिक्किम पुलिस ने सिक्किम में शांति और सद्भाव बनाए रखने में निरंतर महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

 

 

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