छत्तीसगढ़

अखिल भारतीय हिंदू परिषद के प्रदेश संगठन महामंत्री गणेश तिवारी ने उठाए भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के सवाल

कांकेर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत जिला उत्तर बस्तर कांकेर में आयोजित भर्ती परीक्षा को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। भर्ती परीक्षा के परिणाम में किए गए संशोधन को लेकर अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय हिंदू परिषद के प्रदेश संगठन महामंत्री गणेश तिवारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

उन्होंने आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से परिणाम में फेरबदल किया गया है।

भर्ती परिणाम जारी होने के दूसरे दिन हुआ संशोधन

जानकारी के अनुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एनएचएम कार्यालय द्वारा 4 मई 2026 को भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी किया गया था। लेकिन इसके अगले ही दिन 5 मई 2026 को संशोधित परिणाम सूची जारी कर दी गई। इस संशोधित सूची को लेकर अभ्यर्थियों के बीच कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पहले जारी किए गए परिणाम में जिन उम्मीदवारों को अनुत्तीर्ण या अनुपस्थित बताया गया था, उन्हें संशोधित सूची में उपस्थित दर्शाते हुए उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया।

अभ्यर्थियों ने पारदर्शिता पर उठाए सवाल

भर्ती परीक्षा में अचानक हुए इस बदलाव को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा परिणाम में इस प्रकार बदलाव किया जा सकता है तो पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि बिना किसी स्पष्ट कारण और सूचना के परिणाम में संशोधन किया गया, जिससे चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। युवाओं ने प्रशासन से पूरे मामले की सार्वजनिक जांच कराने की मांग की है ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।

गणेश तिवारी ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की

प्रदेश संगठन महामंत्री गणेश तिवारी ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में इस प्रकार का बदलाव बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी को पहले अनुपस्थित बताया गया और बाद में उसे उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया, तो यह सीधे तौर पर संदेह पैदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से परिणाम में फेरबदल किया गया है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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