बांग्लादेश में नई सरकार बनते ही ये मुस्लिम देश हो गया एक्टिव, भारत के लिए क्यों टेंशन?

बीते साल मई के महीने में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का साथ देने वाला तुर्की एक बार फिर भारत की चिंताएं बढ़ा रहा है। भारत के पड़ोसी देश, बांग्लादेश में नई सरकार बनते ही तुर्की एक्टिव हो गया गया है और अब बांग्लादेश में अपनी रणनीति को सक्रिय करता नजर आ रहा है। बता दें कि बांग्लादेश में इससे पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने तुर्की के नजदीकियां बढ़ाई थीं। अब तारिक रहमान के शपथ लेने के तुरंत बाद तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगान ने अपने बेटे बिलाल एर्दोगान को ढाका दौरे पर भेजा है।
बुधवार सुबह करीब 9 बजे बिलाल एर्दोगान निजी विमान से ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे। अहम बात यह है कि उनके साथ तुर्की कोऑपरेशन एंड कोऑर्डिनेशन एजेंसी यानी TİKA के अध्यक्ष अब्दुल्ला एरेन और मशहूर फुटबॉलर मेसुत ओजिल भी मौजूद थे। जानकारी के मुताबिक इस दौरे की पहले कोई घोषणा नहीं की गई थी और मीडिया को भी इसकी भनक नहीं थी।
न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक एर्दोगान के बेटे ने ढाका पहुंचते ही सबसे पहले TİKA के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेशन ऑफिस का दौरा किया। इसके बाद उन्होंने ढाका यूनिवर्सिटी में TİKA की फंडिंग से बने एक नए मेडिकल सेंटर का उद्घाटन भी किया। TİKA की दक्षिण एशिया में बढ़ती सक्रियता पर भारत में सुरक्षा एजेंसियों और विश्लेषकों की नजर है। लालमोनिरहाट में उसके तकनीकी संस्थान जैसे प्रोजेक्ट्स को लेकर भी सवाल उठे हैं।
कुछ खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि TİKA और उससे जुड़े कुछ तुर्की एनजीओ कट्टरपंथी पैन-इस्लामिस्ट विचारधारा को बढ़ावा दे सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि तुर्की-बांग्लादेश के बढ़ते संबंध तुर्की-पाकिस्तान-चीन के व्यापक समीकरण भी हो सकते हैं, जो भारत के क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश हो सकती है।




