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देश ज़हर में डूब रहा है — IPAP ने ‘जीवन सत्याग्रह’ का राष्ट्रीय ऐलान किया

“पानी से दवा तक सब कुछ ज़हरीला, अब चुप रहना राष्ट्रीय अपराध है” — डॉ. पुरुषोत्तम तिवारी

रायपुर, इडियन पीपुल्स अधिकार पार्टी (IPAP) के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम तिवारी ने आज देशभर में फैल चुके पानी, हवा, भोजन, दवा, शिक्षा और स्वास्थ्य के ज़हरीले संकट को लेकर कड़ा बयान जारी करते हुए “जीवन सत्याग्रह — ज़हर नहीं, जीवन चाहिए” नामक राष्ट्रीय जनआंदोलन की घोषणा की।

 

डॉ. तिवारी ने कहा कि भारत आज उस मोड़ पर खड़ा है जहाँ नागरिक धीरे-धीरे मारे जा रहे हैं, लेकिन इस पर न सरकारें बोल रही हैं, न मीडिया और न ही सिस्टम।

उन्होंने कहा, “हम जिस पानी को पीते हैं वह ज़हर है, जिस हवा में सांस लेते हैं वह ज़हरीली है, जो खाना खाते हैं वह बीमारी है, जो दवा लेते हैं वह व्यापार है और जो शिक्षा मिलती है वह बेरोज़गारी पैदा कर रही है। यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं — यह कॉरपोरेट-सरकार गठजोड़ द्वारा रची गई साज़िश है।”

हर नागरिक ज़हर की चपेट में

IPAP के अनुसार देश की स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है:

गाँव-गाँव और शहर-शहर में पीने का पानी नाइट्रेट, सीवेज और केमिकल से दूषित है

हवा PM2.5 और ज़हरीले कणों से लोगों के फेफड़े नष्ट कर रही है

भोजन कीटनाशक और मिलावट से भरा है

दवाइयाँ और अस्पताल जनता की बीमारी से मुनाफा कमा रहे हैं

स्कूल और शिक्षा व्यवस्था बेरोज़गारों की फैक्ट्री बन चुकी है

युवा नशे और अवसाद में धकेले जा रहे हैं

टैक्स जनता पर बोझ है और कॉरपोरेट पर मेहरबानी

न्याय पैसा और रसूख वालों के पक्ष में झुका हुआ है

डॉ. तिवारी ने कहा,

“यह देश अब नागरिकों के जीवन की नहीं, बल्कि मुनाफाखोरों की सुविधा की व्यवस्था बन गया है। आम आदमी का शरीर इस सिस्टम की प्रयोगशाला बन चुका है।”

‘जीवन सत्याग्रह’ क्या है?

जीवन सत्याग्रह एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन है, जिसका लक्ष्य है:

ज़हरीले पानी और हवा के खिलाफ संघर्ष

मिलावटी भोजन और नकली दवाओं का बहिष्कार

महंगे और भ्रष्ट स्वास्थ्य सिस्टम को चुनौती

बेरोज़गारी और नशे के खिलाफ अभियान

जनता को उसके जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार वापस दिलाना

डॉ. तिवारी ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी चुनाव के लिए नहीं, बल्कि जीवन बचाने के लिए है।

देशवासियों से सीधी अपील

डॉ. पुरुषोत्तम तिवारी ने कहा,

“अगर आज हम नहीं बोले, तो कल हमारे बच्चे बीमार शरीर, कमजोर दिमाग और गुलाम भविष्य के साथ पैदा होंगे। अब हर नागरिक को पूछना होगा — मेरा पानी कब साफ होगा? मेरी हवा कब सुरक्षित होगी? मेरा बच्चा कब स्वस्थ रहेगा?”

उन्होंने चेतावनी दी कि

जो इस ज़हर के खिलाफ नहीं बोलेगा, वह इस ज़हर फैलाने वाले सिस्टम का साथी होगा।इंडियन पीपुल्स अधिकार पार्टी (IPAP) एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल है, जिसकी स्थापना देश की आम जनता के अधिकार, सम्मान और न्याय की रक्षा के उद्देश्य से की गई है। पार्टी का मूल विचार यह है कि भारत की राजनीति पर अब तक कुछ गिनी-चुनी राजनीतिक और कॉरपोरेट ताक़तों का कब्ज़ा रहा है, जबकि देश की असली मालिक जनता को हाशिए पर रखा गया है। IPAP इसी अन्यायपूर्ण व्यवस्था को बदलने के लिए संघर्षरत है।

IPAP की स्थापना 4 सितंबर 2022 को भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में की गई थी। इसके बाद 12 जुलाई 2023 को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा पार्टी को आधिकारिक रूप से पंजीकृत किया गया, जिससे IPAP को एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल का दर्जा प्राप्त हुआ।

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 और लोकसभा चुनाव 2024 के लिए पार्टी को “गुब्बारा” (Balloon) चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया, जिसके माध्यम से IPAP जनता के बीच एक नई, ईमानदार और जनपक्षीय राजनीतिक शक्ति के रूप में सामने आई।

पार्टी का द्वितीय राष्ट्रीय अधिवेशन जबलपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें देशभर से आए प्रतिनिधियों ने संगठन के विस्तार, जन-आंदोलनों और चुनावी रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की। इस अधिवेशन में यह स्पष्ट किया गया कि IPAP का लक्ष्य केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि भारत की राजनीति को जनता के हाथों में वापस सौंपना है।

IPAP का स्पष्ट उद्देश्य है —

जनता को राजनीतिक व्यवस्था का मालिक बनाना, न कि कॉरपोरेट और भ्रष्ट ताक़तों का गुलाम।

आज देश में कांग्रेस और भाजपा जैसी पार्टियाँ सत्ता की राजनीति में जनता को केवल वोट बैंक समझती हैं, जबकि IPAP जनता को निर्णय लेने वाली शक्ति बनाना चाहती है। पार्टी मानती है कि लोकतंत्र तभी जीवित रहेगा जब शासन जनता के हित में और जनता के नियंत्रण में होगा।

IPAP देश के नागरिकों से अपील करती है कि वे

“जनमत की आवाज़ बनें, IPAP से जुड़ें और समाज को नया, ईमानदार व जनपक्षीय नेतृत्व दें।”

IPAP का नारा है —

“ना कांग्रेस – ना बीजेपी, अब आपकी पार्टी IPAP”

यह नारा केवल राजनीतिक विकल्प नहीं, बल्कि भारत में  एक नई जनतांत्रिक चेतना का आह्वान है।

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