छत्तीसगढ़

निजी स्वार्थ के चलते शहर के विकास में पहुंचाया गया बाधा हाई कोर्ट ने किया याचिका को खारिज नहीं था जनहित का मामला

 

जलविहार कॉलोनी के पार्क में कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों और निर्माण को लेकर दायर जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। जलविहार कॉलोनी के रहवासियों ने जनहित की याचिका दायर की थी जिसे हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए मामले की सुनवाई पर रोक लगाई है लगातार जलविहार कॉलोनी वाशी हल्ला मचाते रहे कि यह अवैध है और अवैध रूप से संचालित है मगर हाईकोर्ट ने इस याचिका को ही खारिज कर दिया है व्यक्तिगत निजी स्वार्थ के चलते रायपुर वासियों को जो मनोरंजन बीचो-बीच शहर के मध्य तेलीबांधा मरीन ड्राइव में मिल रहा था जिसे मजबूरन हटाना पड़ा लोग वीकेंड में यहां पहुंचते थे और रिफ्रेशमेंट होकर लौटते थे जिस पर निजी स्वार्थ के चलते हटाना पड़ा आखिरकार हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए इस याचिका को खारिज कर दिया जिसे जनहित याचिका के रूप में दायर किया गया था जैसे कोर्ट ने जनहित से बाहर का मुद्दा बताते हुए ख़ारिज किया

 

 

दरअसल जलविहार कॉलोनी के रहवासियों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कॉलोनी के पार्क और गार्डन क्षेत्र को निजी कंपनी को सौंपकर वहां व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं।

याचिका में कहा गया था कि कुछ लोगों ने अपने रिहायशी मकानों को भी व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया है, जिससे कॉलोनी में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या बढ़ गई है।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्थल निरीक्षण के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया था।

निरीक्षण रिपोर्ट में पार्क क्षेत्र में अन्य संरचनाओं की मौजूदगी की जानकारी दी गई।

हालांकि नगर निगम की ओर से कोर्ट में कहा गया कि पार्क से जुड़ी गतिविधियां नगर निगम और निजी कंपनी के बीच हुए समझौते के तहत की जा रही हैं और इसको सही पाया गया यह पूरी तरह नियमों के अनुसार है। इस रिपोर्ट से यह पता चलता है कि निजी स्वार्थ के लिए जनहित में लगाया गया या याचिका जिसे माननीय हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है लोगों के सुविधाओं के लिए लगाया गया जिसे व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते हटाया गया आखिरकार हाईकोर्ट ने भी फैसला सुनाते हुए इसे जनहित नहीं माना

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button