रायपुर: अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव श्री प्रदुमन शर्मा ने नगर पालिक निगम रायपुर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरटीआई प्रथम अपील के माध्यम से (लगभग चार महीनों के बाद) प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों और स्थल निरीक्षण के आधार पर यह खुलासा हुआ है कि शहर के प्रमुख व्यावसायिक परिसरों—”रिलायंस स्मार्ट पॉइंट” (हीरापुर रोड) और “ABCD कैफे” (कोटा रोड)—द्वारा नगर निगम के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
मुख्य खुलासे और अनियमितताएं:
1. स्वीकृत मानचित्र के अनुसार, दोनों परिसरों में ‘स्टिल्ट पार्किंग’ अनिवार्य थी। लेकिन भवन स्वामियों ने पार्किंग क्षेत्र को अवैध रूप से बंद कर उसे व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया है। इसके कारण ग्राहकों के वाहन मुख्य मार्ग पर खड़े होते हैं, जिससे हीरापुर और कोटा रोड पर निरंतर जाम की स्थिति बनी रहती है।
2. नियमानुसार अनिवार्य 9 मीटर और 12 मीटर के फ्रंट सेट-बैक (खुली जगह) को छोड़ने के बजाय, निर्माण कार्य स्वीकृत सीमा से बाहर जाकर किया गया है। यह ‘छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984’ का स्पष्ट उल्लंघन है।
3. बिना भवन पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त किए इन परिसरों का व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह अवैध और असुरक्षित है।
श्री प्रदुमन शर्मा ने ज़ोन कमिश्नर (ज़ोन 07 एवं 08) को पत्र लिखकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा, “यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि नगर निगम का ‘डंडा’ सिर्फ गरीब रेहड़ी-पटरी वालों और उनकी झुग्गियों पर चलता है, जबकि रसूखदार अमीरों के इन अवैध निर्माणों पर प्रशासन ने आँखें मूंद ली हैं। यहाँ यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या नगर निगम का कानून सिर्फ गरीबों की गुमटियों पर बुलडोजर चलाने के लिए है? आखिर क्यों रसूखदार भवन स्वामियों द्वारा किए गए इन विशाल अवैध निर्माणों पर निगम प्रशासन ने अपनी आँखें मूँद रखी हैं? क्या सार्वजनिक सड़क को पार्किंग स्टैंड में तब्दील करने की खुली छूट दे दी गई है”
श्री शर्मा ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि इन अवैध निर्माणों पर तत्काल ‘बुलडोजर’ की कार्रवाई की जाए या इन्हें सील किया जाए। यदि प्रशासन इस पक्षपातपूर्ण रवैये को नहीं सुधारता है, तो आयोग इसे मानवाधिकारों का हनन मानते हुए मामले को उच्च अधिकारियों और न्यायालय तक ले जाएगा।