छत्तीसगढ़

दूसरे दिन सिरपुर महोत्सव में बिखरी भक्ति, कला और लोक परंपरा की छटा

महासमुंद. सिरपुर महोत्सव 2026 के दूसरे दिन कार्यक्रम की शुरुआत सायं 4 बजे इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ द्वारा प्रस्तुत क्लासिकल वोकल, क्लासिकल इंस्ट्रूमेंट, तबला वादन एवं सुगम संगीत की सुमधुर प्रस्तुतियों से हुई, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की उत्कृष्ट साधना और मधुर स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। इसके पश्चात सूफी स्पिरिचुअल म्यूजिक तथा कबीर संगीत संध्या की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भक्ति और आध्यात्मिकता से जोड़ते हुए महोत्सव परिसर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।
साथ ही संरक्षण एवं विकास बौद्ध कला एवं सांस्कृतिक समाज, मध्य भारत, नागपुर द्वारा प्रस्तुत थेरीगाथा नाट्य मंचन ने बौद्ध संस्कृति, करुणा, त्याग एवं नारी चेतना के संदेश को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इस प्रस्तुति ने सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी सशक्त रूप से उजागर किया। इसके बाद प्रस्तुत भरतनाट्यम नृत्य की आकर्षक और भावपूर्ण प्रस्तुति ने शास्त्रीय नृत्य की गरिमा, लय और सौंदर्य को मंच पर जीवंत कर दिया। नृत्य कलाकारों की भाव-भंगिमाओं और मुद्राओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर संध्या कार्यक्रम में भिलाई की प्रसिद्ध लोक कलाकार पुष्पा साहू द्वारा प्रस्तुत नवा किस्मत लोक कला मंच की शानदार प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति की रंगीन छटा बिखेर दी। उनकी ऊर्जावान और भावपूर्ण प्रस्तुति में पारंपरिक लोकगीत, नृत्य एवं नाट्य शैली का सुंदर समन्वय को दर्शकों ने खूब सराहा। पुष्पा साहू एवं उनकी टीम के मधुर गायन ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। इस दौरान पूरा महोत्सव परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा तथा दर्शक झूमते नजर आए। द्वितीय दिवस की सभी प्रस्तुतियों ने सिरपुर महोत्सव को शास्त्रीय कला, लोकपरंपरा, आध्यात्मिक संगीत एवं आधुनिक संस्कृति के अद्भुत संगम के रूप में स्थापित किया।

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